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गोल्ड, सिल्वर, डेट या इक्विटी ETF में निवेश किया है? कैपिटल गेन टैक्स को समझें
Filing Hub Desk ·

नमस्ते! आजकल बहुत से लोग अलग-अलग तरह के ETFs में निवेश करते हैं – इक्विटी ETF, डेट ETF, गोल्ड ETF और सिल्वर ETF. ये सभी निवेश के अच्छे विकल्प हैं, लेकिन इन पर जो कैपिटल गेन टैक्स लगता है, उसके नियम थोड़े अलग-अलग होते हैं। आपको यह जानना बहुत ज़रूरी है ताकि आप सही टैक्स भर सकें और कोई गलती न हो।
आमतौर पर, जब आप कोई चीज़ खरीदने के बाद ज़्यादा दाम पर बेचते हैं, तो आपको जो फ़ायदा होता है, उसे कैपिटल गेन कहते हैं। इसी गेन पर टैक्स लगता है। ETFs में भी ऐसा ही होता है, लेकिन टैक्स का हिसाब, होल्डिंग पीरियड और इंडेक्सेशन के नियम आपके ETF के प्रकार पर निर्भर करते हैं।
इक्विटी ETFs को इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स माना जाता है। अगर आप इन्हें एक साल के अंदर बेच देते हैं, तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) लगता है, जिस पर 15% टैक्स होता है। अगर आप इन्हें एक साल के बाद बेचते हैं, तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) होता है, जिस पर 1 लाख रुपये से ज़्यादा के गेन पर 10% टैक्स लगता है, और 1 लाख तक के गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता।
गोल्ड और सिल्वर ETFs को नॉन-इक्विटी फंड्स या डेट फंड्स की तरह माना जाता है। अगर आप इन्हें तीन साल के अंदर बेचते हैं, तो गेन आपकी कुल इनकम में जुड़ जाता है और आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। अगर आप इन्हें तीन साल के बाद बेचते हैं, तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) लगता है और इस पर 20% टैक्स लगता है, लेकिन इसमें इंडेक्सेशन का फ़ायदा मिलता है। इंडेक्सेशन से आपकी खरीदने की लागत बढ़ जाती है, जिससे आपका टैक्स योग्य गेन कम हो जाता है।
डेट ETFs पर भी वही नियम लागू होते हैं जो गोल्ड और सिल्वर ETFs पर होते हैं। यानी, तीन साल से कम होल्डिंग पर शॉर्ट टर्म गेन पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स और तीन साल से ज़्यादा होल्डिंग पर 20% LTCG टैक्स (इंडेक्सेशन के साथ)। यह जानना बहुत ज़रूरी है कि 1 अप्रैल 2023 के बाद, डेट म्यूच्यूअल फंड्स पर, अगर उन्हें 31 मार्च 2023 के बाद खरीदा गया है और तीन साल से ज़्यादा होल्ड किया गया है, तो इंडेक्सेशन का फ़ायदा नहीं मिलेगा और उन पर शॉर्ट टर्म गेन की तरह ही स्लैब रेट से टैक्स लगेगा। लेकिन, जो ETFs डायरेक्टली बॉन्ड्स में निवेश करते हैं (ना कि डेट फंड्स में), उन पर अभी भी यह पुराना नियम लागू हो सकता है। यह एक ऐसा पॉइंट है जिस पर आपको अपने सलाहकार से पुष्टि करनी चाहिए।
इसका आप पर क्या असर पड़ेगा
- टैक्स प्लानिंग: आपको पता चलेगा कि कौन से ETF पर कितना टैक्स लगेगा, जिससे आप अपनी टैक्स प्लानिंग बेहतर तरीके से कर पाएंगे।
- निवेश के फैसले: आप यह तय कर पाएंगे कि कौन सा ETF आपके निवेश और टैक्स लक्ष्यों के लिए सबसे अच्छा है।
- गलतियों से बचाव: सही जानकारी होने से आप ITR फाइल करते समय गलतियाँ करने से बचेंगे और पेनल्टी से भी बच सकते हैं।
किन लोगों के लिए ज़रूरी है
- जो लोग इक्विटी, डेट, गोल्ड या सिल्वर ETFs में निवेश करते हैं।
- जो लोग अपनी कमाई पर सही ITR भरना चाहते हैं।
- जो लोग भविष्य में इन ETFs में निवेश करने की सोच रहे हैं।
आपको अब क्या करना चाहिए
- अपने सभी ETF निवेशों की खरीद और बिक्री की तारीखें और कीमतें चेक करें।
- पता करें कि आपने कौन सा ETF कितने समय तक होल्ड किया है।
- अपने निवेश सलाहकार या CA से बात करके अपने कैपिटल गेन टैक्स की सही गणना करवाएं।
- ITR फाइल करते समय, कैपिटल गेन की जानकारी बहुत ध्यान से भरें।
सही जानकारी और सही प्लानिंग से आप न सिर्फ सही टैक्स भर पाएंगे, बल्कि अपनी बचत को भी बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएंगे। अगर आपको अपने ETF निवेशों पर कैपिटल गेन टैक्स समझने या ITR फाइल करने में कोई मदद चाहिए, तो बेझिझक Filing Hub में Adv. Vipul Seth की टीम से संपर्क करें। हम आपकी पूरी मदद करेंगे।
ख़बर का स्रोत: Mint. यह लेख Filing Hub की टीम ने आसान भाषा में तैयार किया है — ज़रूरी फ़ैसले लेने से पहले सरकारी नोटिफिकेशन ज़रूर देखें.
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