Income Tax
विरासत में मिली विदेशी प्रॉपर्टी बेची है? भारत में टैक्स कैसे लगेगा, जानिए
Filing Hub Desk ·

नमस्ते!
आजकल बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके रिश्तेदार विदेश में रहते हैं और कभी-कभी उन्हें विरासत में वहां कोई प्रॉपर्टी मिल जाती है। अब जब उस प्रॉपर्टी को बेचा जाता है, तो एक सवाल खड़ा होता है कि भारत में उस पर टैक्स कैसे लगेगा। अखबार की खबर भी इसी बारे में है। आइए, इसे समझते हैं।
भारत के इनकम टैक्स नियमों के हिसाब से, अगर कोई भारतीय नागरिक किसी विदेशी प्रॉपर्टी को बेचता है, चाहे वह उसे विरासत में ही क्यों न मिली हो, तो उस पर हुए फायदे (capital gain) पर भारत में टैक्स लग सकता है। यह थोड़ा पेचीदा लग सकता है, लेकिन हम इसे आसान बनाएंगे।
भारत में टैक्स के नियम कहते हैं कि आपकी ग्लोबल इनकम पर टैक्स लगता है, अगर आप यहां के रेसिडेंट (निवासी) हैं। इसमें वो इनकम भी शामिल होती है जो आपको विदेश से मिली है, जैसे कि किसी विदेशी प्रॉपर्टी को बेचने से हुआ फायदा।
इसका आप पर क्या असर पड़ेगा
अगर आपने विदेश में मिली कोई प्रॉपर्टी बेची है और आप भारत में टैक्स रेसिडेंट हैं, तो आपको इस बिक्री से हुए मुनाफे को अपनी ITR में दिखाना होगा। इस मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। यह दो तरह का हो सकता है: शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन। यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉपर्टी आपने कितने समय तक अपने पास रखी थी।
अगर प्रॉपर्टी 24 महीने से ज़्यादा समय तक आपके पास थी (या जब आपके पूर्व मालिक के पास थी, उस समय से गिनकर), तो इसे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा। इस पर इंडेक्सेशन बेनिफिट भी मिल सकता है, जिससे आपका टैक्स कम हो सकता है। अगर यह 24 महीने से कम थी, तो यह शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन होगा और आपकी सामान्य इनकम में जुड़कर टैक्स लगेगा।
एक और ज़रूरी बात है, फेयर मार्केट वैल्यू (Fair Market Value) की। जब प्रॉपर्टी आपको विरासत में मिली थी, उस समय की फेयर मार्केट वैल्यू को आपकी 'खरीद लागत' (cost of acquisition) माना जा सकता है। यह नियम थोड़ी राहत दे सकता है।
इसके अलावा, अगर आपने विदेश में उस इनकम पर कोई टैक्स दिया है, तो भारत में आपको डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत उसका क्रेडिट मिल सकता है, ताकि आपको एक ही इनकम पर दो बार टैक्स न देना पड़े।
किन लोगों के लिए ज़रूरी है
यह जानकारी उन सभी भारतीय टैक्सपेयर्स के लिए बहुत ज़रूरी है:
- जिन्हें विदेश में कोई प्रॉपर्टी विरासत में मिली है और उन्होंने उसे बेचा है या बेचने की सोच रहे हैं।
- जो भारत में टैक्स रेसिडेंट हैं और जिनकी ग्लोबल इनकम पर भारत में टैक्स लगता है।
- जो भविष्य में ऐसी किसी प्रॉपर्टी को बेचने की योजना बना रहे हैं।
आपको अब क्या करना चाहिए
- रिकॉर्ड संभालें: प्रॉपर्टी से जुड़े सभी दस्तावेज़ संभाल कर रखें, जैसे कि वसीयत (will), प्रॉपर्टी ट्रांसफर के दस्तावेज़, बिक्री के दस्तावेज़ और विदेश में दिए गए टैक्स के प्रूफ।
- सही कॉस्ट निकालें: प्रॉपर्टी की 'कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन' और 'कॉस्ट ऑफ इंप्रूवमेंट' (अगर कोई हुई है) सही से कैलकुलेट करें। विरासत के मामलों में, इसकी गणना थोड़ी अलग होती है।
- टैक्स की गणना करें: अपनी कैपिटल गेन की सही गणना करें। अगर लॉन्ग-टर्म गेन है तो इंडेक्सेशन का फायदा देखें।
- DTAA का लाभ: अगर आपने विदेश में टैक्स दिया है, तो DTAA के तहत क्रेडिट लेने के लिए ज़रूरी फॉर्म और दस्तावेज़ तैयार रखें।
- समय पर ITR भरें: अपनी ITR में इस इनकम को सही और समय पर घोषित करें। फॉर्म 26AS और AIS जैसी जानकारी को ध्यान से जांचें।
विदेशी इनकम से जुड़े टैक्स नियम थोड़े जटिल हो सकते हैं। इसलिए, अगर आपको विरासत में मिली विदेशी प्रॉपर्टी को बेचने के टैक्स से संबंधित कोई भी सवाल है, तो किसी एक्सपर्ट से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है। Filing Hub पर Adv. Vipul Seth और उनकी टीम आपकी ITR/GST फाइलिंग और अन्य टैक्स से जुड़े मामलों में मदद करने के लिए हमेशा तैयार है। बेझिझक हमसे संपर्क करें!
ख़बर का स्रोत: Mint. यह लेख Filing Hub की टीम ने आसान भाषा में तैयार किया है — ज़रूरी फ़ैसले लेने से पहले सरकारी नोटिफिकेशन ज़रूर देखें.
Need help with your filing?
Our team files income tax returns, GST returns and TDS returns for taxpayers across India. You can also calculate your tax or track an existing filing.