Income Tax
मोबाइल ऐप से साइड इनकम? Section 44ADA से Tax कैसे बचाएं
Filing Hub Desk ·

नमस्ते! आज हम एक बहुत ही काम की बात करेंगे, खासकर उन लोगों के लिए जो मोबाइल ऐप से कुछ एक्स्ट्रा इनकम कमा रहे हैं. हेडलाइन में आपने पढ़ा होगा, Section 44ADA. ये क्या है और ये कैसे आपके टैक्स को कम कर सकता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
सबसे पहले, ये 'Presumptive Taxation' क्या होता है? आम तौर पर, जब आप अपना ITR फाइल करते हैं, तो आपको अपनी सारी इनकम और सारे खर्चों का हिसाब देना होता है. फिर इनकम में से खर्च घटाकर जो प्रॉफिट बचता है, उस पर टैक्स लगता है. लेकिन Presumptive Taxation में सरकार कहती है कि अगर आपकी इनकम एक लिमिट से कम है, तो आप अपने प्रॉफिट का एक तयशुदा (fixed) प्रतिशत बताकर टैक्स भर सकते हैं, बिना सारे खर्चों का हिसाब दिए. इससे काम बहुत आसान हो जाता है!
अब बात आती है Section 44ADA की. यह सेक्शन खास तौर पर उन प्रोफेशनल्स के लिए है जो कोई खास पेशा (profession) करते हैं, जैसे डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, अकाउंटेंट या कोई भी ऐसा काम जिसमें आप अपनी स्किल्स का इस्तेमाल करते हैं. मोबाइल ऐप से साइड इनकम कमाने वाले लोग, जैसे ऐप डेवलपर, डिजाइनर, कंटेंट क्रिएटर, या ऐप के ज़रिए कोई सर्विस देने वाले, अक्सर इसी कैटेगरी में आ सकते हैं. यह सेक्शन कहता है कि अगर आपकी कुल इनकम (gross receipts) एक फाइनेंशियल ईयर में 50 लाख रुपये तक है, तो आप अपनी कुल इनकम का कम से कम 50% अपना प्रॉफिट मान सकते हैं. इस 50% पर ही आपको टैक्स देना होगा, बाकी के 50% को सरकार खर्च मान लेगी. इससे आपको अलग से खर्चों का हिसाब नहीं रखना पड़ता.
मान लीजिए आपने ऐप से 10 लाख रुपये कमाए. अगर आप Section 44ADA चुनते हैं, तो आप अपनी इनकम का 50% यानी 5 लाख रुपये अपना प्रॉफिट दिखा सकते हैं. इसी 5 लाख रुपये पर आपको टैक्स भरना होगा. अगर आपके असली खर्चे इससे कम हैं, तो भी आप 50% का फायदा ले सकते हैं. और अगर आपके असली खर्चे 50% से ज़्यादा हैं, तो आपको regular scheme में जाना होगा और सारे खर्चों का हिसाब रखना होगा, लेकिन तब आपका टैक्स बोझ बढ़ सकता है.
इसका आप पर क्या असर पड़ेगा
- टैक्स में कमी: अगर आपके खर्चे 50% से कम हैं, तो भी आप अपनी इनकम का 50% ही टैक्सेबल प्रॉफिट दिखाएंगे, जिससे आपका टैक्स कम हो सकता है.
- सरल ITR फाइलिंग: आपको अपनी बुक्स ऑफ़ अकाउंट्स (खर्चों का रिकॉर्ड) रखने की ज़रूरत नहीं पड़ती. इससे ITR फाइल करना बहुत आसान हो जाता है.
- कम Compliance: छोटे प्रोफेशनल्स के लिए सरकार ने यह आसान तरीका बनाया है ताकि वे बिना ज्यादा कागजी कार्रवाई के अपना टैक्स भर सकें.
किन लोगों के लिए ज़रूरी है
यह सेक्शन उन सभी प्रोफेशनल्स के लिए है जिनकी कुल इनकम एक साल में 50 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं है और जो नोटिफाइड प्रोफेशनल्स की लिस्ट में आते हैं. मोबाइल ऐप से कमाई करने वाले बहुत से लोग, जैसे फ्रीलांस डेवलपर, ग्राफिक डिजाइनर, ऐप के ज़रिए कंसल्टेंसी देने वाले, ऑनलाइन ट्यूटर आदि, इसमें शामिल हो सकते हैं.
अगर आप अपनी इनकम का 50% से ज़्यादा खर्च करते हैं और उसका हिसाब रख सकते हैं, तो आप इस सेक्शन को नहीं चुन सकते और आपको रेगुलर ITR फाइल करना होगा.
आपको अब क्या करना चाहिए
- अपनी कुल इनकम (Gross Receipts) चेक करें: सुनिश्चित करें कि यह 50 लाख रुपये की लिमिट के अंदर हो.
- अपने प्रोफेशन की कैटेगरी समझें: क्या आपका काम Section 44ADA के तहत नोटिफाइड प्रोफेशन में आता है? यह जानना जरूरी है.
- खर्चों का अनुमान लगाएं: क्या आपके असली खर्चे आपकी कुल इनकम के 50% से कम हैं? अगर हाँ, तो यह सेक्शन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.
- सही ITR फॉर्म चुनें: इस सेक्शन का फायदा लेने के लिए आपको सही ITR फॉर्म (जैसे ITR-4 Sugam) फाइल करना होगा.
- एक्सपर्ट से सलाह लें: अपनी स्थिति के हिसाब से यह आपके लिए सही है या नहीं, इसके लिए एक टैक्स एक्सपर्ट से ज़रूर बात करें.
तो, अगर आप मोबाइल ऐप से साइड इनकम कमा रहे हैं और आपका काम एक प्रोफेशन की कैटेगरी में आता है, तो Section 44ADA आपके लिए टैक्स बचाने का एक शानदार और आसान तरीका हो सकता है. ITR फाइल करते समय इस ऑप्शन पर ज़रूर विचार करें. अगर आपको ITR/GST फाइलिंग या किसी भी टैक्स संबंधित मदद की ज़रूरत है, तो Filing Hub की टीम से संपर्क करें. हम आपकी पूरी मदद करेंगे.
ख़बर का स्रोत: Mint. यह लेख Filing Hub की टीम ने आसान भाषा में तैयार किया है — ज़रूरी फ़ैसले लेने से पहले सरकारी नोटिफिकेशन ज़रूर देखें.
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