Personal Finance
एक ही तरह के म्यूचुअल फंड में भी अलग-अलग टैक्स क्यों लगता है?
Filing Hub Desk ·

नमस्ते! मैं Filing Hub से विपुल सेठ, आपका सीए दोस्त. आज हम एक ऐसी बात पर चर्चा करेंगे जो कई म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स को हैरान कर सकती है: एक ही कैटेगरी के फंड में इन्वेस्ट करने पर भी टैक्स अलग-अलग क्यों लगता है?
आप सोचते होंगे कि म्यूचुअल फंड तो म्यूचुअल फंड है, उस पर एक जैसा ही टैक्स लगेगा. लेकिन ऐसा नहीं है. भारत में म्यूचुअल फंड पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि उस फंड में कितना पैसा इक्विटी (शेयर बाजार) में लगा है. अगर किसी फंड का 65% से ज़्यादा पैसा इक्विटी में लगा है, तो उसे 'इक्विटी ओरिएंटेड' फंड माना जाता है. अगर इक्विटी में 65% से कम पैसा लगा है, तो उसे 'डेट ओरिएंटेड' फंड माना जाता है, भले ही उसकी कैटेगरी इक्विटी जैसी लगे.
यहीं पर सारा खेल बदल जाता है. इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स पर टैक्स कम लगता है खासकर अगर आप उन्हें एक साल से ज़्यादा रखते हैं (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन). डेट ओरिएंटेड फंड्स पर टैक्स अलग तरीके से लगता है, जो अक्सर इक्विटी फंड्स से ज़्यादा हो सकता है, खासकर लॉन्ग टर्म में भी.
उदाहरण के लिए, मान लीजिए दो फंड हैं. दोनों 'मल्टी-एसेट' फंड की कैटेगरी में हैं. एक फंड ने इक्विटी में 70% पैसा लगाया है और दूसरे ने 50% पैसा इक्विटी में और बाकी गोल्ड या इंटरनेशनल इक्विटी में. तो, पहले वाला इक्विटी ओरिएंटेड माना जाएगा और दूसरे वाला डेट ओरिएंटेड. बस यहीं से टैक्स का हिसाब बदल जाएगा.
इसका आप पर क्या असर पड़ेगा
सीधा असर आपके हाथ में आने वाले मुनाफे पर पड़ेगा. अगर आप किसी फंड को इक्विटी फंड समझकर इन्वेस्ट कर रहे हैं, लेकिन टैक्स के हिसाब से वो डेट फंड निकला, तो आपको उम्मीद से ज़्यादा टैक्स देना पड़ सकता है. इससे आपकी इन्वेस्टमेंट की प्लानिंग भी बिगड़ सकती है.
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (एक साल से कम समय में बेचना) पर भी अंतर आता है. इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स पर 15% टैक्स लगता है, जबकि डेट ओरिएंटेड फंड्स पर यह आपकी इनकम स्लैब के हिसाब से लगता है, जो 30% तक भी हो सकता है.
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एक साल से ज़्यादा रखने पर) के लिए, इक्विटी फंड्स में 1 लाख रुपये तक का मुनाफा टैक्स-फ्री होता है, उसके बाद 10% टैक्स लगता है. वहीं डेट फंड्स पर, 3 साल से ज़्यादा रखने पर इंडेक्सेशन के फायदे के साथ 20% टैक्स लगता है, और 3 साल से कम रखने पर आपकी इनकम स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है.
किन लोगों के लिए ज़रूरी है
यह जानकारी उन सभी लोगों के लिए बहुत ज़रूरी है जो म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं, चाहे वे नए हों या पुराने. खासकर अगर आप इन फंड्स में इन्वेस्ट करते हैं:
- मल्टी-एसेट फंड्स (Multi-Asset Funds)
- हाइब्रिड फंड्स (Hybrid Funds)
- फंड ऑफ फंड्स (Fund of Funds)
- इंटरनेशनल इक्विटी फंड्स (International Equity Funds)
- गोल्ड फंड्स (Gold Funds)
इन फंड्स में इक्विटी एक्सपोजर 65% से कम हो सकता है, जिससे वे टैक्स के लिए डेट फंड माने जा सकते हैं. आपको हमेशा अपने फंड के पोर्टफोलियो की जांच करनी चाहिए.
आपको अब क्या करना चाहिए
- फंड का पोर्टफोलियो देखें: अपने मौजूदा और नए फंड्स का फैक्टशीट या स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट (SID) देखें. पता करें कि इक्विटी में कितना पैसा लगा है.
- टैक्स ट्रीटमेंट समझें: इन्वेस्टमेंट करने से पहले पता करें कि उस फंड पर टैक्स कैसे लगेगा - इक्विटी फंड की तरह या डेट फंड की तरह.
- अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से बात करें: अगर आपको कोई कन्फ्यूजन है, तो अपने फाइनेंशियल एडवाइजर या सीए से सलाह लें.
- लंबे समय का सोचें: अपने इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों और समय को ध्यान में रखकर ही फंड चुनें.
तो, अगली बार जब आप म्यूचुअल फंड चुनें, तो सिर्फ उसकी कैटेगरी या पिछले रिटर्न पर ही ध्यान न दें, बल्कि यह भी देखें कि टैक्स के हिसाब से वो क्या है. सही जानकारी के साथ आप बेहतर फैसले ले सकते हैं और अपनी मेहनत की कमाई का ज़्यादा हिस्सा बचा सकते हैं. ITR फाइलिंग हो या GST, किसी भी टैक्स या कंप्लायंस में मदद के लिए Filing Hub से संपर्क करें.
ख़बर का स्रोत: Mint. यह लेख Filing Hub की टीम ने आसान भाषा में तैयार किया है — ज़रूरी फ़ैसले लेने से पहले सरकारी नोटिफिकेशन ज़रूर देखें.
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