Income Tax
प्रोफेशनल टैक्स आपकी सैलरी से क्यों कटता है और क्या ITR फाइल करते समय इसकी छूट मिलती है?
Filing Hub Desk ·

नमस्ते! हम सब देखते हैं कि हमारी सैलरी स्लिप में कुछ डिडक्शन्स होते हैं. इनमें से एक होता है 'प्रोफेशनल टैक्स'. बहुत से लोग सोचते हैं कि यह क्या बला है और इसकी ज़रूरत क्या है. आज हम इसी प्रोफेशनल टैक्स के बारे में बात करेंगे, एकदम सीधी और सरल भाषा में, जैसे आपके अपने CA समझाते हैं.
सबसे पहले तो यह समझिए कि प्रोफेशनल टैक्स आपकी राज्य सरकार लेती है. यह केंद्र सरकार का टैक्स नहीं है. जैसे इनकम टैक्स केंद्र सरकार लेती है, वैसे ही प्रोफेशनल टैक्स राज्यों का टैक्स है. यह उन लोगों पर लगता है जो नौकरी करते हैं, या कोई पेशा करते हैं, जैसे डॉक्टर, वकील, CA, आदि.
आपके मन में सवाल आ सकता है कि जब हम इनकम टैक्स देते ही हैं, तो यह प्रोफेशनल टैक्स क्यों? दरअसल, यह हर राज्य अपने हिसाब से अपने खर्चे चलाने के लिए लगाता है. इसकी रकम बहुत ज़्यादा नहीं होती, अक्सर ₹200-₹250 प्रति महीना होती है, लेकिन यह राज्यों के लिए आय का एक छोटा सा ज़रिया होता है.
इसका आप पर क्या असर पड़ेगा
आपकी सैलरी से कटने वाला यह प्रोफेशनल टैक्स आपकी टैक्स देनदारी को कम करने में मदद करता है. कैसे?
- ITR में छूट: अच्छी खबर यह है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 16(iii) के तहत, आप प्रोफेशनल टैक्स की रकम को अपनी सैलरी इनकम से घटा सकते हैं. इसका मतलब है कि आप जितनी रकम प्रोफेशनल टैक्स के तौर पर देते हैं, उतनी इनकम पर आपको इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता. इससे आपकी टैक्सेबल इनकम कम हो जाती है और आपका इनकम टैक्स कुछ कम हो जाता है.
- टैक्स सेविंग: मान लीजिए आप साल में ₹2400 प्रोफेशनल टैक्स देते हैं (₹200 प्रति महीना). ITR फाइल करते समय, यह ₹2400 आपकी कुल इनकम से घट जाएंगे. तो आपको ₹2400 पर इनकम टैक्स नहीं देना होगा, जिससे आपकी थोड़ी टैक्स सेविंग हो जाएगी.
किन लोगों के लिए ज़रूरी है
- सैलरीड लोग: जो लोग नौकरी करते हैं और उनकी सैलरी एक तय सीमा से ज़्यादा है, उन पर यह टैक्स लागू होता है. यह सैलरी स्लिप में दिख जाता है और एंप्लॉयर ही काट लेता है.
- पेशेवर लोग: डॉक्टर, वकील, CA, आर्किटेक्ट जैसे पेशेवर जो अपना काम करते हैं, उन्हें भी यह टैक्स देना होता है, अगर वे ऐसे राज्य में काम कर रहे हैं जहां यह लागू है.
- बिजनेस करने वाले: कुछ राज्यों में छोटे बिजनेस वाले भी इस टैक्स के दायरे में आते हैं.
यह टैक्स हर राज्य में लागू नहीं होता और हर राज्य में इसकी दरें भी अलग-अलग होती हैं. साथ ही, इसकी ज़्यादा से ज़्यादा सीमा ₹2500 प्रति वर्ष होती है, यानी कोई भी राज्य आपसे एक साल में ₹2500 से ज़्यादा प्रोफेशनल टैक्स नहीं ले सकता.
आपको अब क्या करना चाहिए
- सैलरी स्लिप चेक करें: अपनी सैलरी स्लिप में 'प्रोफेशनल टैक्स' डिडक्शन देखें. इससे आपको पता चलेगा कि हर महीने कितना कट रहा है.
- टैक्स बचाने के लिए इसे यूज़ करें: जब आप ITR भरें, तो पक्का करें कि प्रोफेशनल टैक्स की रकम को डिडक्शन के तौर पर क्लेम किया गया है. ज़्यादातर सॉफ्टवेयर और CA ऑटोमैटिकली इसे कर देते हैं, पर एक बार चेक कर लेना अच्छा है.
- राज्य के नियमों की जानकारी रखें: अगर आप अपना बिजनेस या पेशा कर रहे हैं, तो अपने राज्य के प्रोफेशनल टैक्स के नियमों की जानकारी रखें. पता करें कि यह आप पर लागू होता है या नहीं और इसकी फाइलिंग कैसे होती है.
प्रोफेशनल टैक्स, भले ही छोटा हो, लेकिन इसकी जानकारी होना ज़रूरी है, खासकर जब बात ITR भरने की हो. यह एक ऐसा खर्च है जिसकी छूट आपको मिलती है और आपको इसका पूरा फायदा उठाना चाहिए. अगर आपको ITR फाइलिंग या GST से जुड़ी कोई भी मदद चाहिए, तो हमारी टीम Filing Hub पर हमेशा तैयार है आपकी सहायता करने के लिए. बेझिझक हमसे संपर्क करें!
ख़बर का स्रोत: Mint. यह लेख Filing Hub की टीम ने आसान भाषा में तैयार किया है — ज़रूरी फ़ैसले लेने से पहले सरकारी नोटिफिकेशन ज़रूर देखें.
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